कैलाशपति मिश्र

कैलाशपति मिश्र (5 अक्टूबर 1923 – 3 नवम्बर 2012) भारत के एक राजनेता थे। वे भारतीय जनता पार्टी के नेता थे। वे गुजरात के भूतपूर्व राज्यपाल थे तथा कुछ समय के लिए राजस्थान के भी राज्यपाल रहे।
समझ नहीं पा रहा हूं कहां से शुरू करूं एक कर्मठ और कुशल संगठनकर्ता के रूप में या कार्यकर्ताओं को अपने हृदय में स्थान देकर अभिभावक के रूप वाले आत्मीय सम्बोधन से अथवा पुचकारने की तरकीब अपनाने वाले से – कैलाशपति मिश्र का यही है जीवन दर्शन। उनका यही बड़प्पन प्रत्येक कार्यकर्ताओं के हृदय में उनके बसने का कारण भी है। उनसे मेरा छात्र जीवन से जुड़ाव रहा।
उनके ही संरक्षण और मार्गदर्शन में मैंने राजनीति की सीढ़ी पर चढ़ना सीखा और निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। उनके विविध आयामी व्यक्तित्व पर प्रकाश डालना मुझ जैसे कार्यकर्ता के लिए सूर्य को दीपक दिखाने समान है सन् 1971 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में सक्रिय होने के बाद से ही उनका स्नेह,
संरक्षण और आशीर्वाद मिलता रहा लेकिन 1978 में पटना नगर निगम का पार्षद चुने जाने के बाद उनके मार्गदर्शन की महती आवश्यकता पड़ी उसी साल भारतीय जनता युवा मोर्चा का पटना जिला का अध्यक्ष बना तो निरंतर प्रदेश पार्टी मुख्यालय में उनके दर्शन करते रहने का सौभाग्य मिलता रहा 1982 में मेरे पटना नगर निगम का उप महापौर और उसके
अगले ही साल भाजपा पटना महानगर का अध्यक्ष बनने के बाद मैं पार्टी की मुख्यधारा में गया जिसका सारा श्रेय आदरणीय कैलाश जी को जाता है भारतीय जनता युवा मोर्चा का महामंत्री, उपाध्यक्ष का पद सम्हालते हुए अध्यक्ष पद तक सन् 1983 से 1995 तक राजनीति में सक्रिय रहने के प्रेरणा स्त्रोत भी आदरणीय कैलाशपति जी रहे।
1995 में प्रदेश भाजपा का महामंत्री बनने और उसी वर्ष पटना साहिब विधान सभा क्षेत्र से भारी बहुमत से चुनाव जीतने के बाद कैलाशपति मिश्र के आशीर्वाद की छांव मे निरंतर बैठ सीखने और प्रेरणा लेने का मौका मिलता रहा भारतीय जनसंघ का 2बी राजेंद्रनगर स्थित कार्यालय हो या कदमकुआं स्थित विजय निकेतन का संघ कार्यालय, कैलाश जी आम कार्यकर्ताओं के लिए सुलभ रूप से उपलब्ध मिलते थे तब मोबाइल का जमाना नहीं था।
टेलीफोन की घंटी बजाकर समस्याओं का निदान कर देते थे। पंडित कैलाशपति मिश्र आदर्श जीवन के धनी तो थे ही सादा जीवन उच्च विचार की प्रतिमूर्ति भी थे भारतीय जनसंघ के स्थापना काल से भारतीय जनता पार्टी तक संगठन के एक-एक तार को जोड़कर पार्टी को कैसे मजबूती दी जाए इसके तमाम गुणों के भंडार थे कैलाशपति जी।
1998 में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की कमान मिलने और 2003 में बिहार में एनडीए का संयोजक बनने के बाद भी उनका वात्सल्य प्रेम मुझे मिलता रहा संगठन के कार्यों से निरंतर क्षेत्रों का दौरा और पार्टी मुख्यालय में लगातार बैठकों के दौर पर भी उनकी निगाहें लगी रहती थीं।
उनके एक नहीं अनेक ऐसे संस्मरण हैं जिस पर प्रकाश डालूं तो पुस्तक का रूप ले लेगा युवा शक्ति की नब्ज टटोल उसे ऊंचे पायदान पर बढ़ाने को पारखी कैलाशपति मिश्र अनुशासन प्रिय व्यक्ति थे। जो भी उनके पास आया, उनका होकर रह गया कैलाश जी संगठन के शीर्ष पदों पर रहे, बिहार सरकार में वित्त विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभाग के मंत्री, राज्यसभा के सदस्य और गुजरात के राज्यपाल भी रहे। लेकिन उन्होंने कभी भी चिंतक और विचारक की प्रवृत्ति का त्याग नहीं किया। एक खासियत उनकी थी-उनका कवित्व दर्शन। उनकी कविताओं का संग्रह पठनीय और प्रेरणादायक है।
‘प्रारंभिक जीवन’ के अपने आलेख में कैलाशपति जी ने सही लिखा है- ‘कर्म कठोर जीवन निष्ठा के साथ और संघ संस्कारों से प्रेरित चलता रहा तो कभी किसी कार्यकर्ता के मन में हीनभावना नहीं आएगी, विफलता की पीड़ा भी नहीं सताएगी लेकिन अपने अहंकार का त्याग तो करना ही पड़ेगा’। ऐसे उदात्त और हृदयस्पर्शी विचार रखने वाले अपने अभिभावक, मार्गदर्शक और हृदय सम्राट कैलाशपति मिश्र जी की पांचवीं पुण्य तिथि पर उन्हें मेरा शत-शत नमन।








