1849 में तभी से वे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में शामिल हुए और मंगल बैरकपुर की सैनिक छावनी में “34 वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री” की पैदल सेना में एक सिपाही रहे। 1857 में भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह ईस्ट इंडिया कंपनी की 34वीं बंगाल इंफेन्ट्री के सिपाही थे। इनका जन्म भारत में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के…
Read More »शख़्सियत
चंद्रशेखर आजाद (23 जुलाई 1906 – 27 फरवरी 1931) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अत्यंत सम्मानित और लोकप्रिय क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी थे। वे भगत सिंह के अन्यतम साथियों में से थे। असहयोग आंदोलन समाप्त होने के बाद चंद्रशेखर आजाद की विचारधारा में बदलाव आ गया और वे क्रांतिकारी गतिविधियों से जुड़ कर हिंदुस्तान सोशल रिपब्लिकन आर्मी में शामिल हो गए। उन्होंने कई क्रांतिकारी गतिविधियों जैसे काकोरी…
Read More »भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उनके नेतृत्व के कारण जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस ने उन्हें “बलिया का शेर” के रूप में वर्णित किया था। इनका जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के एक गांव रट्टुचक में हुआ था। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की एक महत्वपूर्ण विशेषता गांधीजी और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की पहले-पहल गिरफ्तारी थी, जिसके कारण आंदोलन को आगे बढ़ाने…
Read More »योगेंद्र शुक्ल (1896 – 19 नवंबर 1960) बिहार के एक भारतीय राष्ट्रवादी, स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने सेलुलर जेल ( कालापानी ) में सेवा की, और वे हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) के संस्थापकों में से थे । अक्टूबर 1932 में, न्यायिक सचिव, एसीडीएवीज़, जैसा कि गवर्नर इन काउंसिल द्वारा निर्देशित किया गया था, ने डीआईजी (सीआईडी) को क्रांतिकारी दोषियों के नामों का सुझाव देने के लिए कहा, जिसमें उन अपराधों को दिखाया गया था जिनके…
Read More »बैकुंठ शुक्ल (15 मई 1907 – 14 मई 1934) एक भारतीय राष्ट्रवादी और क्रांतिकारी थे। वह हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) के संस्थापकों में से एक, योगेंद्र शुक्ला के भतीजे थे । उन्हें फणींद्र नाथ घोष की हत्या के लिए फांसी दी गई थी, जो सरकारी सरकारी गवाह बन गए थे, जिसके कारण भगत सिंह , सुखदेव और राजगुरु को फांसी दी गई थी । 1931 में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को लाहौर षडयंत्र कांड में फांसी…
Read More »पंडित रविशंकर शुक्ल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रसिद्ध नेता और एक स्वतंत्रता सेनानी थे। वे 1 नवंबर 1956 को अस्तित्व में आए जब नए राज्य मध्य प्रदेश के पहले प्रधानमंत्री नियुक्त हुए थे। पंडित रविशंकर शुक्ल को नए ‘मध्य प्रदेश के पुरोधा’ के रूप में याद किया जाता है। उन्होने राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई, स्वदेशी खादी, राष्ट्रीय शिक्षा को बढ़ावा दिया और असहयोग सविनय…
Read More »बिहार के प्रमुख राजनीतिक कार्यकर्ता शीलभद्र याजी का जन्म 2 मार्च, 1916 ई. को पटना जिले में हुआ था। नमक सत्याग्रह के समय विद्यालय छोड़ने के बाद वे एक बार फिर पढ़ने के लिए भर्ती हुए पर 1932 में सदा के लिए स्वतंत्रता संग्राम में सम्मिलित हो गए। वे किसान नेता स्वामी सहजानंद और सुभाष चंद्र बोस के निकट संपर्क में आए तथा गांधी जी के विचारों का भी उन पर प्रभाव पड़ा। वे विद्यार्थी जीवन में ही 1928 में कोलकाता की कांग्रेस में भाग ले चुके थे। कार्ल मार्क्स के साहित्य का…
Read More »रामवृक्ष बेनीपुरी का जन्म 23 दिसम्बर, 1899 ई. में बेनीपुर नामक गाँव, मुज़फ़्फ़रपुर ज़िला, बिहार में हुआ था। इन्होंने प्रारम्भिक शिक्षा अपने गाँव की पाठशाला में ही पाई थी। बाद में वे आगे की शिक्षा के लिए मुज़फ़्फ़रपुर के कॉलेज में भर्ती हो गए।इसी समय राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने ‘रौलट एक्ट’ के विरोध में ‘असहयोग आन्दोलन’ प्रारम्भ किया। ऐसे में बेनीपुरी जी ने भी कॉलेज त्याग दिया और निरंतर स्वतंत्रता संग्राम में जुड़े रहे। इन्होंने…
Read More »महामहोपाध्याय पण्डित राम अवतार शर्मा (1877 – 1929) संस्कृत के विद्वान, भारतविद् तथा इतिहासकार थे। अपनी विद्वत्ता और तार्किकता के कारण वे पूरे देश में विख्यात थे। वे संस्कृत, हिन्दी, अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, लैटिन सहित भारत की अनेक भाषाओं के ज्ञाता थे। उन्होने दर्शन, काव्य, साहित्य, व्याकरण, इतिहास, धर्मशास्त्र, भाषाविज्ञान, आदि सभी विषयों पर निबन्ध लिखे। उनकी बहुत बड़ी देन है कि जो ज्ञान अंग्रेजी भाषा के…
Read More »पटना विश्वविद्यालय तथा दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व-कुलपति। अन्तरविश्वविद्यालय बोर्ड, संस्कृत अकादमी तथा भोजपुरी अकादमी, बिहार के पूर्व अध्यक्ष। पूर्व अध्यक्ष, बिहार हिन्दी ग्रन्थ अकादमी। पटना विश्वविद्यालय तथा बिहार विश्वविद्यालय के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष। अध्यक्ष, भारतीय हिन्दी परिषद्, ग्वालियर तथा आनन्द अधिवेशन तथा हिन्दी साहित्य सम्मेलन, पटना। भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार की प्रवर-समिति के पूर्व सदस्य। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, वैज्ञानिक तकनीकी शब्दावली आयोग, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान…
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