ललित नारायण मिश्र

ललित नारायण मिश्र (2 फरवरी 1923 – 3 जनवरी 1975) भारत के एक राजनेता थे जो 1973 से 1975 तक भारत के रेलमंत्री रहे। 3 जनवरी 1975 को समस्तीपुर बम-विस्फोट कांड में उनकी मृत्यु हो गयी थी।
ललित नारायण मिश्र. आजाद भारत के पहले कैबिनेट मंत्री, जिनकी हत्या की गई. उनके मौत की तारीख थी 3 जनवरी, 1975. उन पर एक दिन पहले 2 जनवरी को बम फेंका गया था. जगह थी समस्तीपुर रेलवे स्टेशन का प्लेटफॉर्म नंबर तीन (घटना के समय ये दो नंबर प्लेटफॉर्म था) जहां अब उनकी समाधि बनी है.
बिहार को अगर एक आम समझिए, तो इसकी एक फांक है मिथिला. यहीं पैदा हुए थे ललित नारायण मिश्र. सहरसा जिले के बलुआ बाजार में. मिथिला में ललित नारायण मिश्र अपने पूरे नाम से नहीं पुकारे जाते. वहां आज भी उनका जिक्र ‘ललित बाबू’ कहकर ही होता है. लोग कहते हैं, ललित बाबू बेवक्त न मरे होते, तो बिहार आज बहुत आगे होता.
इस लाइन में बड़ी चूक है. मरे न होते की जगह मारे न गए होते पढ़िएगा. मिथिला के लोग मैथिल कहलाते हैं. ललित बाबू का मारा जाना मैथिलों का ‘कलेक्टिव’ अफसोस है. अगली पांत का इतना बड़ा नेता मिथिला को फिर कभी नहीं मिला. ललित नारायण मिश्र की जब हत्या हुई, तब वो रेलमंत्री थे. उनकी सोची कई परियोजनाएं अब जाकर शुरू हो सकी हैं. अफसोस तो लाजमी है.
फिर एक और बात है. लोग कहते हैं, वो जिंदा होते तो प्रधानमंत्री बन जाते. कि इंदिरा गांधी भी उन्हें PM बनने से रोक नहीं पातीं. कहते तो ये भी हैं कि अगर ललित बाबू जिंदा होते, तो जेपी कभी इंदिरा गांधी के खिलाफ आंदोलन शुरू ही न करते. हत्या हुई यानी साजिश रची गई. उनकी मौत के समय से जो बातें शुरू हुईं, वो कभी ठंडी नहीं हुईं. कई बातें हैं. कई अफवाहें हैं.








