शीलभद्र याजी

बिहार के प्रमुख राजनीतिक कार्यकर्ता शीलभद्र याजी का जन्म 2 मार्च, 1916 ई. को पटना जिले में हुआ था। नमक सत्याग्रह के समय विद्यालय छोड़ने के बाद वे एक बार फिर पढ़ने के लिए भर्ती हुए पर 1932 में सदा के लिए स्वतंत्रता संग्राम में सम्मिलित हो गए।

वे किसान नेता स्वामी सहजानंद और सुभाष चंद्र बोस के निकट संपर्क में आए तथा गांधी जी के विचारों का भी उन पर प्रभाव पड़ा। वे विद्यार्थी जीवन में ही 1928 में कोलकाता की कांग्रेस में भाग ले चुके थे। कार्ल मार्क्स के साहित्य का भी उन पर प्रभाव पड़ा और कुछ समय वे कांग्रेस समाजवादी पार्टी में भी रहे।

शीलभद्र याजी ने देश की आज़ादी की लड़ाई में बढ़-चढ़ कर भाग लिया था। उन्हें आज़ादी के आंदोलनों में भाग लेने के कारण 1930, 1932, 1933, और 1940 में गिरफ्तार किया गया था। 1941 में भूमिगत होने के बाद 1945 में पकड़े गये तो द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के बाद ही रिहा हो सके। 1939 में जब सुभाष बाबू ने फ़ारवर्ड ब्लॉक की स्थापना की तो याजी उस में सम्मिलित हो गए।

राजनीतिक कार्यकर्ता शीलभद्र याजी 1940 में भी अखिल भारतीय किसान सभा के महामंत्री बने। इससे पहले वे 1937 में बिहार की विधानसभा के सदस्य चुने गए। स्वतंत्रता के बाद 1957 और 1964 में याजी राज्यसभा के सदस्य बने। स्वतंत्रता सेनानियों की समस्याओं के समाधान के लिए बने संगठन के अध्यक्ष की हैसियत से अंत तक वे काम करते रहे। उन्होंने विभिन्न दलों को मिलाकर संयुक्त वाममोर्चा बनाने का भी प्रयत्न किया था।

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