भगवान श्री परशुराम जी के इक्कीस नाम

  1. भार्गव………….
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    ये नाम परशुराम का वंश बताता है. भार्गव माने ‘भृगु का वंशज’. परशुराम भृगु के कुल में पैदा हुए थे. महाभारत के आदि पर्व के अनुसार वंशावली कुछ ऐसी हैः
    भृगु → च्यवन → अर्व → रिचिका → जमदग्नि → परशुराम
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  2. भृगुपति…………….
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    इसका अर्थ है भृगु के वंशजों का भगवान. इस नाम का प्रयोग कालीदास ने ‘मेघदूत’ में, जयदेव ने ‘गीता गोविंद’ में और तुलसीदास ने ‘रामचरितमानस’ में किया है.
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  3. रेणुकेय…………….
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    अर्थात् रेणुका का पुत्र. रेणुका ऋषि जमदग्नि की पत्नी और परशुराम की मां थीं. ब्रह्माण्ड पुराण के अनुसार वो राजा प्रसेनजीत की बेटी थीं.
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  4. कोङ्कणासुत……………
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    अर्थात् कोंकणा का बेटा. परशुराम की मां रेणुका को कोंकणा के नाम से भी जाना जाता है. कोंकणा का अर्थ होता है कोंकण देश में पैदा होने वाली. स्कंद पुराण के ‘सह्याद्री खंड’ में परशुराम को समुद्र से कोंकण को ​​पुनः प्राप्त करने को वर्णन किया गया है.
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  5. जामदग्न्य………….
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    यहां नाम में पिता के नाम का वर्णन है. जामदग्न्य: माने जमदग्नी के बेटे. ब्रह्मांड पुराण के अनुसार जमदग्नी और रेणुका का आश्रम नर्मदा नदी के तट पर था.
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  6. राम………….
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    राम का अर्थ होता है वो जिसमें योगी आनंद लेते हैं. परशुराम का ये नाम दो और महापुरुष के हैं : दशरथ के पुत्र राम और कृष्ण के भाई बलराम. परशुराम को इनसे अलग बताने के लिए प्राय: इन्हें ‘भार्गव राम’ कहा जाता है.
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  7. परशुधर…………..
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    परशुधर माने जिसके हाथ में फरसा हो. ब्रह्मांड पुराण के अनुसार, परशुराम को उनके गुरु शिव ने सफेद रंग का फरसा दिया था. कहते हैं कि इसमें मृत्यु की आग का तेज था.
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  8. परशुराम……………
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    इसका अर्थ होता है वो जिसका प्रिय हथियार परशु यानी फरसा हो. परशुराम का ये सबसे प्रचलित नाम है और उनके ज़्यादातर चित्रणों में वो फरसे के साथ ही दृश्यमान होते हैं.
    अक्षय तृतीया के दिन पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा के रथ का निर्माण भी शुरू होता है. भारत के कुछ भागों में, खेतों की जुताई शुरू हो जाती है. ये दिन शादियों, गृह प्रवेश और सोने की खरीद के लिए भी शुभ माना जाता है.
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  9. खण्डपरशु………………
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    खण्डपरशु: अर्थात् वो जिसके पास सब कुछ नष्ट कर देने वाला फरसा हो. ये भगवान शिव का भी एक नाम है. ब्रह्मांड पुराण के अनुसार, परशुराम के फरसे से ही गणेश के दांतों में से एक टूटा था.
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  10. ऊर्ध्वरेता……………..
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    इस नाम का अर्थ परशुराम के ब्रह्मचर्य से है. नाम का शाब्दिक अर्थ है – “जिसकी यौन ऊर्जा ऊपर की ओर बहती हो” परशुराम ब्रह्मचारी थे, इसलिए उन्हें ये नाम दिया गया है.
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  11. मातृकच्छिद………….
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    ये नाम उस कथा से आया है जिसमें परशुराम ने अपनी ही मां का सिर काट दिया था । जमदग्नि ने अपने बेटों को उनका सिर काटने का आदेश दिया था । सारे बेटों ने मना कर दिया लेकिन परशुराम ने आदेश का पालन किया.
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  12. मातृप्राणद…………….
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    मातृप्राणद – वो जिसने अपनी मां को जीवन दिया हो. जब परशुराम ने रेणुका का सिर काट दिया, तब खुश होकर जमदग्नि ने कहा कि वो उनकी सारी इच्छाएं पूरी करेंगे. परशुराम ने मांगा कि उनकी मां को फिर से जीवित कर दिया जाए. लेकिन रेणुका को दोबार जीवित होने पर ये याद न रहे कि उनका सिर काटा गया था और उन्हें उनके पाप से मुक्त कर दिया जाए. जमदग्नि ने ऐसा ही किया.
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  13. कार्त्तवीर्यारि…………..
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    जो कर्तवीर्य अर्जुन के दुश्मन हों. ब्रह्मांड पुराण और महाभारत के अनुसार, कर्तवीर्य अर्जुन की सेना ने जमदग्नि की दैवी गाय को छीनकर ऋषि को मार दिया था. जब परशुराम को इस बारे में पता चला तो उन्होंने कर्तवीर्य अर्जुन की राजधानी महिशिमती पर चढ़ाई करके युद्ध में उसे मार दिया था.
    जमदग्नि परशुराम को गुस्सा न करने के बारे में समझाते हुए ।
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  14. क्षत्रान्तक……………
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    क्षत्रियों का विनाश करने वाला. कई पुराणों के अनुसार, परशुराम अपने पिता की हत्या को लेकर इतने क्रोधित थे कि उन्होंने पूरी धरती के क्षत्रियों के साथ 21 बार युद्ध किया. हर बार धरती से क्षत्रियों का बिलकुल विनाश हो जाता था.
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  15. न्यक्ष………………
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    अर्थात् वो जो अपमानित करे. इस नाम का अर्थ है ‘वो जो आंखों को नीचे झुका दे’. परशुराम ने क्षत्रियों को 21 बार अकेले हराकर अपमानित किया था.
    ‘अक्षय’ – जो कभी नष्ट न हो. ये त्योहार वैशाख के शुक्ल पक्ष की तीसरी तारीख को मनाया जाता है, इसलिए नाम में ‘तृतीया’ जुड़ा है.
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  16. न्यस्तदण्ड……………….
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    न्यस्तदण्ड माने जिसने दंड को छोड़ दिया हो. यहां ‘दंड’ दंडित करने के संकल्प के लिए है. 21 युद्धों के बाद, परशुराम तपस्या करने के लिए महेंद्र पर्वत चले गए थे. उन्होंने इस तरह ‘दंड’ को छोड़ दिया था.
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  17. क्रौञ्चारि…………
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    मल्लिनत के अनुसार, परशुराम और कार्तिकेय में एक प्रतियोगिता हुई थी, जिसमें उन्होंने पक्षियों के पार जाने के लिए क्रौंच पर्वत में छेद कर दिया था. इसी लिए परशुराम का एक नाम क्रौञ्चारि पड़ गया था, माने क्रौंच पर्वत का दुश्मन.
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  18. ब्रह्मराशि…………
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    बहुत ज़्यादा तपस्या करने वाला. भीष्म ने इस नाम का प्रयोग महाभारत के उद्योग पर्व में तब करते हैं, जब वो अपने गुरु परशुराम के साथ हुए अपने युद्ध के बारे में बताते हैं.
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  19. स्वामिजङ्घी……
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    माने वो जिसके पैर किसी राजा जैसे हों. हालांकि वो एक ब्राह्मण पैदा हुए थे, लेकिन परशुराम की शक्ति और साहस किसी क्षत्रिय जैसा ही माना जाता था.
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  20. सह्याद्रिवासी……………
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    अर्थात् वो जो सह्याद्री में रहता है. स्कंद पुराण के सह्याद्री-खंड में बताया गया है कि भारत के दक्षिण पश्चिम में परशुराम ने परशुराम क्षेत्र बसाया था.
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    21.चिरंजीवी ………………
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    ये वाला आसान है. माने वो जो चिर काल तक जिए, जो अमर हो. आनंद रामायण के अनुसार परशुराम उन सात लोगों में हैं जिन्हें अमरत्व प्राप्त है, माने जो मौत से जी गया हो. बाकि के छह भी जान लीजिए – अश्वत्थामा, बालि, व्यास, हनुमान, विभीषण और कृपा ।

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