गोदावरीश मिश्र

गोदावरीश मिश्र ओड़िया भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित आत्मकथा ‘अर्द्धशताब्दीर ओड़िशा ओ तहिंरे मो स्थान के लिये उन्हें सन् १९६१ में साहित्य अकादमी पुरस्कार (ओड़िया) से सम्मानित किया गया।

देश सेवा की और सामाजिक बुराइयों को दूर करने की भावना गोदावरीश मिश्र के अन्दर आरंभ से ही थी। बहुत-सी रूढ़ियों का पालन न करने के कारण सामाजिक बहिष्कार की भी उन्होंने परवाह नहीं की। उनके सामने अध्ययन के लिये इंग्लैण्ड और अमेरिका जाने का अवसर भी आया, परंतु उन्होंने अस्वीकार कर दिया।

भारत की अंग्रेज़ सरकार उन्हें डिप्टी कलेक्टर की नौकरी भी दे रही थी, लेकिन उन्होंने उसे भी स्वीकार नहीं किया। इसके स्थान पर उन्होंने पं. गोपबन्धु द्वारा स्थापित ‘सत्यवादी स्कूल’ में 30 रुपये प्रतिमाह वेतन पर अध्यापक बनना स्वीकार किया।

इससे यह सिद्ध हो जाता है कि वे एक सच्चे राष्ट्र भक्त थे और देश सेवा की भावना उनके भीतर गहराई तक जमी हुई थी। राष्ट्रीय नवजागरण के क्षेत्र में भी गोदावरीश मिश्र की लेखनी का बड़ा योगदान रहा।

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